Potato Disease:आलू की फसल में लगने वाले 5 खतरनाक रोग एवं निरंतरण उपाय

Potato Disease : भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसमें कई प्रकार की फसलों को उगाया जाता है। जिम आलू की फसल एक अलग ही योगदान रखती है आलू की खेती एक नगदी फसल के रूप में देश में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। आलू की फसल को गरीबों का मित्र भी कहा जाता है इसकी बुवाई रवि सीजन में अक्टूबर माह में की जाती है। लेकिन आलू की फसल को प्रभावित करने मैं रोग एवं कीटों के प्रभाव से फसल के प्रमुख रोगों की पहचान तथा उनके बचाव के लिए जानकारी दी गई है।

Potato Disease:आलू की फसल में लगने वाले 5 खतरनाक रोग एवं निरंतरण उपाय
Potato Disease:आलू की फसल में लगने वाले 5 खतरनाक रोग एवं निरंतरण उपाय

आलू की फसल में कई प्रकार की रोग हो सकते हैं जो उसकी उपज को प्रभावित कर सकते हैं। रोगों को निरंतर करने के लिए कुछ प्रमुख सुझाव एवं उपाय हैं। यहां कुछ प्रमुख आलू के रोगों और उनके निरंतर के उपायका उल्लेख नीचे लेख के माध्यम से किया गया है।

आलू की फसल में लगने वाले 5 खतरनाक

  1. एर्ली ब्लाइट (Early Blight):

  • लक्षण: पत्तियों पर काले धब्बे, छिद्र, और उसके चारों ओर हलके हरे रंग के घेरे होते हैं।
  • नियंत्रण: कुचलकर सड़ा हुआ पौधा तथा पौधों के निचले पत्तियों को काटकर नष्ट करें, फफुंदनाशकों का सही समय पर प्रयोग करें।

2.लेट ब्लाइट (Late Blight):

  • लक्षण: पत्तियों पर सफेद रंग के छोटे धब्बे बनते हैं, जो बाद में काले हो जाते हैं।
  • नियंत्रण: फफुंदनाशकों का प्रयोग करें और समय पर प्रतिरोधी प्रबंधन कार्यक्रम अपनाएं।

3. आलू मोजेइक (Potato Mosaic):

  • लक्षण: पत्तियों पर पीला, हरा, और अच्छे से परिभाषित मोजेइक बनता है।
  • नियंत्रण: नकारात्मक पौधपूषण की रोकथाम के लिए पूर्व पूषण योजनाएं अपनाएं और समय पर पौधों को स्वस्थ रखें।

4.आलू के पत्तों पर सफ़ेदी लाली रंग के चकत्ते (Early Leaf Spot):

  • लक्षण: पत्तियों पर सफ़ेदी लाली रंग के चकत्ते बनते हैं।
  • नियंत्रण: रोगप्रतिरोधी आलू किस्मों का प्रयोग करें और समय पर पेस्टिसाइडों का प्रयोग करें।

5.रोट नेमैटोड (Root-knot Nematode):

  • लक्षण: पौधों की रूट पर गांठें बनती हैं, जिससे पौधों का स्वस्थ विकास रुक जाता है।
  • नियंत्रण: जैविक खेती तकनीकों का प्रयोग करें, रोगप्रतिरोधी आलू किस्मों का प्रयोग करें, और अच्छे से ड्रेन होने वाली भूमि का चयन करें।

यहां दी गई सलाहें आम रूप से प्रयुक्त नियंत्रण उपाय हैं, लेकिन स्थानीय भूमि और मौसम की विशेषताओं को ध्यान में रखकर किसानों को अपनी खेती के लिए उपयुक्त रोग नियंत्रण कार्रवाई करनी चाहिए।

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